शनिवार, 21 अप्रैल 2012

आज का प्रश्न-270question no-270

आज का प्रश्न-270question no-270
प्रश्न-270 : प्रकाश का वेग (Speed of Light)ज्ञात करने का सबसे पहला प्रयास किस विख्यात वैज्ञानिक ने किया था ?
उत्तर: प्रकाश का वेग (Speed of Light) नापने का सबसे पहला प्रयास विख्यात इतालवी वैज्ञानिक गलीलियो ने सत्रवी सदी में किया था। रात के समय अपने सहायक और दो शटर लगी लालटेन की सहयता से एक मील (1.6 km) दूर जा कर बारी बारी योजना अनुरूप लालटेन के कपाट खोले तो वर यह जान गए थे कि प्रकाश के आने जाने में ज़रा सी देरी थी।
गेलिलियो ने सहायक से कहा कि मैं अपने लालटेन के कपाट खोलूँगा जैसे ही आपको रोशनी की चमक दिखे तुमने भी लालटेन का कपाट खोल देना है और किया भी ऐसे ही सुक्ष्म सा अंतर भी आया फिर उन्होंने दूरी बढ़ा (दुगनी) कर प्रयोग किया तो समय में कोई परिवर्तन नहीं पाया गया। वो समझ गए की प्रकाश इतना तेज चलता है कि इतनी दूरी चलने में कुछ भी समय नहीं लगता जो अंतर पहले आया था उसे 'प्रतिक्रिया की देरी' कहा गया। 
तो  इस प्रकार गेलिलियो ने प्रकाश का वेग (Speed of Light) नापने का सबसे पहला प्रयास किया। 
इसके बाद भी प्रयास किये गए इन में दूसरा प्रयास डेनिश खगोलविद रोमर तथा हायजेंस ने 1675 Rømer's determination of the speed of light में किया जो बाद में प्रकाश का वेग (Speed of Light) नापने का आधार बना। उन्होंने अपने सहायक के साथ वृहस्पति के चन्द्रमाओं के ग्रहण का प्रेक्षण करते हुए यह पाया कि प्रत्येक ग्रहण में चंद्रमा वृहस्पति की छाया में गायब हो जाता है। पुनः उदय पर ऐसी दो स्तिथियों में प्रकाश के पृथ्वी तक पहुचने की समय अवधियो  में अंतर होता है। कभी यह अंतर कभी कम व कभी ज्यादा होता है। ऐसा पृथ्वी की स्तिथि के कारण होता है पृथ्वी और वृहस्पति के बीच की दूरी जब कम या ज्यादा होती है प्रकाश के पहुचने के दो समयावधि के अंतर व वृहस्पति से पृथ्वी की दूरी की गणना से प्रकाश का वेग 1,85,000 मील प्रति सेकंड ज्ञात कर लिया था। 
इस के बाद 19वीं शताब्दी में फ्रांसीसी वैज्ञानिक फिज़ू Hippolyte Fizeau ने अपेक्षाकृत बहुत कम दूरी के भीतर ही प्रयोग करके प्रकाश के वेग की माप कर ली थी घूमते हुए दांतेदार चक्के वाला प्रयोग करके प्रकाश के वेग की माप की थी। 
आशीष श्रीवास्तव जी फेसबुक मित्रों का बहुत बहुत धन्यवाद
सभी टिप्पणी कर्ताओं का जी धन्यवाद

प्रस्तुति: सी.वी.रमण विज्ञान क्लब यमुनानगर

3 टिप्‍पणियां:

आशीष श्रीवास्तव ने कहा…

रोमर तथा हायजेंस 1675

दर्शन लाल बवेजा ने कहा…

टॉपॉलॉजी, ग्राफ थ्योरी और नेटवर्क आज गणित की प्रोन्नत शाखाएं हैं एक सामान्य से और जन-साधारण के कौतुहल प्रश्न से इन विधाओं का विकास हुआ। कोनिग्सबर्ग में प्रोगल नदी पर बने सात पुलों से यह कहानी शुरू होती है। वहां के निवासी सातों पुलों को एकही बार में, किसी भी पुल पर दुबारा न जाकर पार करने की कोशिश करते थे। आयलर ने सिद्ध किया कि सातों पुल सतत चलते हुए, मार्गको दोहराए बिना पार नहीं किए जा सकते।
उन्होंने इसके सांस्थिक प्रारूप के माध्यम से इसे नेटवर्क की समस्या में परिवर्तित कर इसका हल प्राप्त किया। आयलर का यह हल 1735 में प्रकाशित हुआ। उन्होंने यह भी सिद्ध किया कि एक बहुफलक में µ किनारों की संख्या +2 = शीर्षों की संख्या + फलकों की संख्या
E+2 = V+F
आयलर का यह कार्य टापॉलॉजी, ग्राफथ्योरी और नेटवर्क के विकास के लिए आधारभूत सिद्ध हुआ।

Neeraj नीरज نیرج ने कहा…

अद्भुत रोचक जानकारी। हिन्दी मे विज्ञान को सरलता से समझाने के लिए हार्दिक धन्यवाद। नियमित तौर पर पठनीय।