Thursday, October 31, 2013

आज का प्रश्न-484 question no-484

आज का प्रश्न-484 question no-484
प्रश्न-484: सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा मेँ कैसे बदलते हैं?
उत्तर : सौर ऊर्जा सूर्य से प्राप्त शक्ति को कहते हैं। इस ऊर्जा को ऊष्मा या विद्युत में बदल कर अन्य प्रयोगों में लाया जाता है। उस रूप को ही सौर ऊर्जा कहते हैं। घरों, कारों और वायुयानों में सौर ऊर्जा का प्रयोग होता है। ऊर्जा का यह रूप साफ और प्रदूषण रहित होता है।सूर्य से ऊर्जा प्राप्त कर उसे प्रयोग करने के लिए सोलर पैनलों की आवश्यकता होती है। सोलर पैनलों में सोलर सेल होते हैं जो सूर्य की ऊर्जा को प्रयोग करने लायक बनाते हैं। यह कई तरह के होते हैं। जैसे पानी गर्म करने वाले सोलर पैनल बिजली पहुंचाने वाले सोलर पैनलों से भिन्न होते हैं। सौर ऊर्जा को दो तरीकों से प्रयोग हेतु बदला जाता है।
  1. सौर तापीय विधि (सोलर थर्मल): इससे सूर्य की ऊर्जा से हवा या तरल को गर्म किया जाता है। इस विधि का प्रयोग घरेलू कार्यो में किया जाता है।
  2. प्रकाशविद्युत विधि (फोटोइलेक्ट्रिक): इस विधि में सौर ऊर्जा को बिजली में बदलने के लिए फोटोवोल्टेक सेलों का प्रयोग होता है। फोटोवोल्टेक सेल का रखरखाव अपेक्षाकृत होता है। इस विधि के लिये ही सौर सेल बनाये जाते हैं।

Wednesday, October 30, 2013

आज का प्रश्न-483 question no-483

आज का प्रश्न-483 question no-483
प्रश्न-483: आदमी और जानवर मेँ से पहले कौन आया?
उत्तर : जीवन का विकास क्रमिक रूप से हुआ है। सबसे पहले एक कोशीय जीव जैसे अमीबा, जीवाणु बने, उसके पश्चात बहुकोशीय जीव बने। जीवन का विकास पहले पानी मे अर्थात समुद्र मे हुआ उसके पश्चात जमीन पर। मनुष्य का विकास तो जीवन की उत्पत्ति के लाखों करोडों वर्ष बाद मे हुआ है। हम कह सकते है कि जानवर मनुष्यों से करोडो वर्ष पहले आये है।

Tuesday, October 29, 2013

आज का प्रश्न-482 question no-482

आज का प्रश्न-482 question no-482
प्रश्न-482: चेतना (consciousness) क्या है?
उत्तर : चेतना कुछ जीवधारियों में स्वयं के और अपने आसपास के वातावरण के तत्वों का बोध होने, उन्हें समझने तथा उनकी बातों का मूल्यांकन करने की शक्ति का नाम है।
विज्ञान के अनुसार चेतना वह अनुभूति है जो मस्तिष्क में पहुँचनेवाले अभिगामी आवेगों से उत्पन्न होती है। इन आवेगों का अर्थ तुरंत अथवा बाद में लगाया जाता है। चेतना मनुष्य की वह विशेषता है जो उसे जीवित रखती है और जो उसे व्यक्तिगत विषय में तथा अपने वातावरण के विषय में ज्ञान कराती है। इसी ज्ञान को विचारशक्ति (बुद्धि) कहा जाता है। यही विशेषता मनुष्य में ऐसे काम करती है जिसके कारण वह जीवित प्राणी समझा जाता है। मनुष्य अपनी कोई भी शारीरिक क्रिया तब तक नहीं कर सकता जब तक कि उसको यह ज्ञान पहले न हो कि वह उस क्रिया को कर सकेगा। कोई भी मनुष्य किसी विघातक पदार्थ अथवा घटना से बचने के लिए अपने किसी अंग को तब तक नहीं हिला सकता, जब तक कि उसको यह ज्ञान न हो कि कोई घातक पदार्थ उसके सामने है और उससे बचने के लिए वह अपने अंगों को काम में ला सकता है। उदाहरणार्थ, हम एक ऐसे मनुष्य के बारे में सोच सकते हैं जो नदी की ओर जा रहा है। यदि वह चलते-चलते नदी तक पहुँच जाता है और नदी में घुस जाता है तो वह डूबकर मर जाएगा। वह अपना चलना तब तक नहीं रोक सकता और नदी में घुसने से अपने को तब तक नहीं बचा सकता जब तक कि उसकी चेतना में यह ज्ञान उत्पन्न नहीं होता कि उसके समने नदी है और वह जमीन पर तो चल सकता है, परंतु पानी पर नहीं चल सकता। मनुष्य की सभी क्रियाओं पर उपर्युक्त नियम लागू होता है चाहे, ये क्रियाएँ पहले कभी हुई हों अथवा भविष्य में कभी हों। मनुष्य केवल चेतना से उत्पन्न प्रेरणा के कारण कोई काम कर सकता है।

Saturday, October 26, 2013

आज का प्रश्न-481 question no-481

आज का प्रश्न-481 question no-481

प्रश्न-481: सिलिका क्या है ? रेत , बालू , कांच , पत्थर , मेँ भी कोई अंतर होता है क्या?

उत्तर : उत्तर: सिलिका, यह सिलिकान और आक्सीजन का यौगिक है, इसका रासायनिक नाम SiO2(सिलिकान डाय आक्साईड) है। रेत, बालू, कांच और पत्थर, इन सभी मे सिलिका मौजूद होता है, अंतर इनके क्रिस्टल संरचना मे होता है। इसके क्रिस्टल संरचना की जानकारी आप इस लिंक से प्राप्त कर सकते है 

आज का प्रश्न-480 question no-480

आज का प्रश्न-480 question no-480

 
प्रश्न-479: क्या पृथ्वी को श्याम विवर (Black Hole)से भविष्य मे कोई परेशानी/संकट हो सकता है?

उत्तर :  पृथ्वी से हजारो प्रकाशवर्ष की दूरी पर कोई भी श्याम विवर नही है। हमारा सूर्य सारे सौर मंडल के साथ आकाशगंगा ’मंदाकिनी’ की परिक्रमा कर रहा है, संभव है कि भविष्य मे वह किसी श्याम विवर के समीप पहुंचे लेकिन ऐसा लांखो करोडो वर्ष के बाद ही होगा। इसकी संभावना भी करोड़ो मे से एक है?

Thursday, August 29, 2013

आज का प्रश्न-479 question no-479

आज का प्रश्न-479 question no-479
 प्रश्न-479:भारतीय नारी पीने के पानी के लिए रोज ही औसतन कितने मील पैदल चलती है?

Tuesday, August 27, 2013

आज का प्रश्न-478 question no-478

आज का प्रश्न-478 question no-478
प्रश्न-478:  मध्य भारत के मध्य प्रदेश और गुजरात राज्य में बहने वाली एक प्रमुख नदी कौनसी है?
उत्तर : नर्मदा मध्य भारत के मध्य प्रदेश और गुजरात राज्य में बहने वाली एक प्रमुख नदी है। महाकाल पर्वत के अमरकण्टक शिखर से नर्मदा नदी की उत्पत्ति हुई है। इसकी लम्बाई प्रायः 1310 किलोमीटर है। यह नदी पश्चिम की तरफ जाकर खम्बात की खाड़ी में गिरती है। इस नदी के किनारे बसा शहर जबलपुर उल्लेखनीय है. इस नदी के मुहाने पर डेल्टा नहीं है। जबलपुर के निकटभेड़ाघाट का नर्मदा जलप्रपात काफी प्रसिद्ध है। इस नदी के किनारे अमरकंटक, नेमावरशुक्लतीर्थ आदि प्रसिद्ध तीर्थस्थान हैं जहाँ काफी दूर-दूर से यात्री आते रहते हैं। नर्मदा नदी को ही उत्तरी और दक्षिणी भारत की सीमारेखा माना जाता है।

आज का प्रश्न-477 question no-477

आज का प्रश्न-477 question no-477


प्रश्न-477 : आर्सेनिक युक्त पानी पीने से क्या हानि है? 
उत्तर:  आर्सेनिक युक्त पानी पीने से मनुष्य पहले मेलानोसिस (शरीर के विभिन्न अंगों पर काले धब्बे पड़ना), फिर केटोसिस (काले धब्बों का गांठ में तब्दील होना और उसमें मवाद भर जाना) और अंततः कैंसर से पीड़ित होकर मरना पड़ता हैं।

Tuesday, June 25, 2013

आज का प्रश्न-476 question no-476

आज का प्रश्न-476 question no-476
प्रश्न-476: नमी में रहने से ताँबे (कापर) पर हरे रंग की परत क्यूँ जमा हो जाती है?
उत्तर :  ताँबे पर हवा-पानी का सामान्य स्थितियों में कोई विशेष प्रभाव नहीं होता फिर भी लम्बे समय तक खुले में रखने से इसके ऊपर हरे रंग के क्षारीय कॉपर कार्बोनेट की एक पतली परत जम जाती है और यह हरा जंग नज़र आने लगता है।                                                                         

Monday, June 24, 2013

आज का प्रश्न-475 question no-475



आज का प्रश्न-475 question no-475 
प्रश्न-475: गर्म करने पर लोहा पहले लाल और फिर सफेद प्रकाश क्यों उत्सर्जित करता है ?

उत्तर: गर्म करने पर जैसे जैसे लोहे का ताप बढ़ता है इसके परमाणुओं से पहले दीर्घ  तरंगदैर्ध्यों की और फिर क्रमशः छोटे होते जाते तरंगदैर्ध्यों की विद्युत चुम्बकीय तरंगे अधिकाधिक परिमाण में निकलती है। लोहे के परमाणुओं से 300 डिग्री सेल्सियस  पर अवरक्त किरणें निकलती है जिनकी शक्ति इतनी नहीं होती कि वे प्रकाशिकीय स्नायुओं को उद्दीपित कर दिखाई दे सके इसलिए इसके पास हाथ ले जाने पर गर्मी का अनुभव तो होता है पर लोहे के टुकडे का रंग काला ही दिखाई पडता है। लगभग 805 डिग्री सेल्सियस  पर लोहे से लाल रंग का दृष्य प्रकाश उत्सर्जित होने लगता है। और अधिक ताप बढ़ाने पर यह लाल रंग चमकीला हो जाता है और फिर इससे सभी तंरगदैर्ध्यो का दृष्य प्रकाश उत्सर्जित होता है और इसलिए यह सफ़ेद  नज़र आने लगता है।