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Monday, February 22, 2016

आज का प्रश्न-491 question no-491

आज का प्रश्न-491 question no-491

प्रश्न-491 : सूर्यग्रहण को नंगी आँखोँ से देखना मना होता है क्योँ?

उत्तर : 
सूर्यग्रहण ही नही सूर्य को किसी भी समय नंगी आंखो से देखना मना होता है। 
सूर्य से प्रकाश के अतिरिक्त पराबैंगनी किरणे निकलती है जो आंखो को क्षति पहुंचा सकती है और यह क्षति हमेशा के लिये हो सकती है। पराबैंगनी किरणे से कैंसर भी हो सकता है।

Friday, February 19, 2016

आज का प्रश्न-490 question no-490

आज का प्रश्न-490 question no-490

प्रश्न-489 : कुछ जानवरों की  आँखें रात्री में क्यूँ चमकती हैं ?

उत्तर : आंखों में स्थित रेटिना में दो प्रकार की कोशिका होती हैं- एक फोटोरिसेप्टर कोशिका व दूसरी रॉड कोशिका। 
रॉड कोशिका प्रकाश संवेदी होती हैं और कम प्रकाश में उपयोगी होती हैं। कोन कोशिका रंगों व चमकीलेपन के प्रति संवेदी होती हैं। 
बिल्ली में रॉड कोशिका की अपेक्षा कोन कोशिका की संख्या अधिक होती है। अंधेरे में जब बिल्ली अपनी आंखों को पूरा खोलती है तो सम्पूर्ण उपस्थित प्रकाश टेपटिम ल्यूसिडम नामक पर्त पर गिरता है, जो कि क्रिस्टल से बनी होती है। यह पर्त सभी दिशाओं में आंख के अंदर व बाहर प्रकाश उत्सर्जित करती है, जिससे बिल्ली पर्याप्त रूप से देख सकें और हमें प्रतीत होता है कि उसकी आंखें चमक रही हैं।

Tuesday, November 5, 2013

आज का प्रश्न-487 question no-487

आज का प्रश्न-487 question no-487

प्रश्न-487 : क्या मनुष्य के पास ऐसी टेक्नोलॉजी होगी की वो जो चाहे हासिल कर सके ?

उत्तर : यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर आसान नही है।
"जो चाहे हासिल कर सके" यह काफी व्यापक है।
यदि आपका आशय भौतिक वस्तुओं से है तब यह संभव है। यदि आप चाहे कि मुझे अभी "खीर" खानी है तब भविष्य मे मशीनें आपको वह उसी समय बिना दूध, चावल के बना कर दे सकती है जो स्वाद और गुणधर्मो मे असली खीर के जैसे ही होगी। कृत्रिम मांस भी बनाया जा चुका है जिसे खाया जा सकता है।
आप चाहे कि आप चाँद पर बसना चाहते है, यह भी संभव है कि चंद्रमा पर मानव के रहने लायक वातावरण बनाया जा सके।
भविष्य मे बीमारीयां कम होंगी, अंग प्रत्यारोपण संभव होगा लेकिन मृत्यु पर विजय पाना कठिन।
पृथ्वी के वातावरण, सुनामी , बाढ, भूकंप जैसी आपदाओ पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा, लेकिन पूर्ण नियंत्रण कठिन।
कुल मिलाकर "जो चाहे" वह हासिल करना तो संभव नही लेकिन "बहुत कुछ" हासिल किया जा सकेगा"

Sunday, November 3, 2013

आज का प्रश्न-486 question no-486

आज का प्रश्न-486 question no-486
प्रश्न-486: एक शून्य द्रव्यमान का कण (फोटोन) संवेग (momentum - p) का वहन कैसे कर सकता है , क्योंकि द्रव्यमान के शून्य होने पर संवेग भी शून्य होना चाहिये? 
उत्तर:  फोटान जिसका द्रव्यमान शून्य होता है।
न्युटन के अनुसार,
गतिज ऊर्जा E=1/2mv2
संवेग P=mv
m=द्रव्यमान , v = गति
लेकिन यदि आप फोटान(प्रकाश) के लिये द्रव्यमान m=0 रखें तो आप पायेंगे कि
E=0
P=0
लेकिन यह तो गलत है! यदि फोटान ऊर्जा का वहन नही करते है तो उससे वस्तुयें गर्म कैसे हो जाती है?
समस्या आती है न्युटन के नियमो से! ये नियम पूरी तस्वीर नहीं बनाते है और जब प्रकाश की बात होती है तो वे गलत सिद्ध होते है।
सापेक्षतावाद के नियमो के अनुसार द्रव्यमान वाले और द्रव्यमान रहित(m=0) कणो मे मूलभूत अंतर है। दोनो के लिये एक समीकरण का प्रयोग नही किया जा सकता है।
कोई भी कण जिसका द्रव्यमान शून्य हो हमेशा प्रकाशगति से यात्रा करता है, जबकि द्रव्यमान वाले कणो की गति प्रकाशगति से कम होगी और वह शून्य (स्थिर) भी हो सकती है। ध्यान रहे : प्रकाश और साधारण पदार्थ दोनो अलग है और दोनो को संचालित करने वाले नियम अलग है।
1905 मे आइंस्टाइन के अनुसार
E2=P2c2+m2c4.
इसी वर्ष पाया गया था कि प्रकाश दोहरा व्यवहार रखता है, वह कण और तरंग दोनो के जैसे व्यवहात करता है। फोटान जो प्रकाश के कण है वे अपने द्रव्यमान या गति से संचालित नही होते है। वे अपनी आवृति(frequency) से संचालित होते है:
E=hf
h = प्लैंक का स्थिरांक(Planck’s constant)
प्रकाश के लिये m=0
इसलिये E=Pc (गति और संवेग अनुपातिक होते है)।
ध्यान रहे कि संवेग कभी शून्य नही हो सकता है, क्योंकि शून्य द्रव्यमान और शून्य संवेंग का अर्थ है कुछ भी नही(nothing)। दूसरे शब्दो मे आप कह सकते है कि प्रकाश कभी स्थिर नही हो सकता है।

Saturday, November 2, 2013

आज का प्रश्न-485 question no-485

आज का प्रश्न-485 question no-485
प्रश्न-485: ब्रह्माण्ड क्या मतलब होता है?
उत्तर: ब्रह्माण्ड अर्थात सब कुछ। मै ,आप, हमारी पृथ्वी, सूर्य , सभी तारे , आकाशगंगाये, उनके मध्य का रिक्त स्थान, यह सभी ब्रह्माण्ड मे आता है।

Thursday, October 31, 2013

आज का प्रश्न-484 question no-484

आज का प्रश्न-484 question no-484
प्रश्न-484: सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा मेँ कैसे बदलते हैं?
उत्तर : सौर ऊर्जा सूर्य से प्राप्त शक्ति को कहते हैं। इस ऊर्जा को ऊष्मा या विद्युत में बदल कर अन्य प्रयोगों में लाया जाता है। उस रूप को ही सौर ऊर्जा कहते हैं। घरों, कारों और वायुयानों में सौर ऊर्जा का प्रयोग होता है। ऊर्जा का यह रूप साफ और प्रदूषण रहित होता है।सूर्य से ऊर्जा प्राप्त कर उसे प्रयोग करने के लिए सोलर पैनलों की आवश्यकता होती है। सोलर पैनलों में सोलर सेल होते हैं जो सूर्य की ऊर्जा को प्रयोग करने लायक बनाते हैं। यह कई तरह के होते हैं। जैसे पानी गर्म करने वाले सोलर पैनल बिजली पहुंचाने वाले सोलर पैनलों से भिन्न होते हैं। सौर ऊर्जा को दो तरीकों से प्रयोग हेतु बदला जाता है।
  1. सौर तापीय विधि (सोलर थर्मल): इससे सूर्य की ऊर्जा से हवा या तरल को गर्म किया जाता है। इस विधि का प्रयोग घरेलू कार्यो में किया जाता है।
  2. प्रकाशविद्युत विधि (फोटोइलेक्ट्रिक): इस विधि में सौर ऊर्जा को बिजली में बदलने के लिए फोटोवोल्टेक सेलों का प्रयोग होता है। फोटोवोल्टेक सेल का रखरखाव अपेक्षाकृत होता है। इस विधि के लिये ही सौर सेल बनाये जाते हैं।

Wednesday, October 30, 2013

आज का प्रश्न-483 question no-483

आज का प्रश्न-483 question no-483
प्रश्न-483: आदमी और जानवर मेँ से पहले कौन आया?
उत्तर : जीवन का विकास क्रमिक रूप से हुआ है। सबसे पहले एक कोशीय जीव जैसे अमीबा, जीवाणु बने, उसके पश्चात बहुकोशीय जीव बने। जीवन का विकास पहले पानी मे अर्थात समुद्र मे हुआ उसके पश्चात जमीन पर। मनुष्य का विकास तो जीवन की उत्पत्ति के लाखों करोडों वर्ष बाद मे हुआ है। हम कह सकते है कि जानवर मनुष्यों से करोडो वर्ष पहले आये है।

Tuesday, October 29, 2013

आज का प्रश्न-482 question no-482

आज का प्रश्न-482 question no-482
प्रश्न-482: चेतना (consciousness) क्या है?
उत्तर : चेतना कुछ जीवधारियों में स्वयं के और अपने आसपास के वातावरण के तत्वों का बोध होने, उन्हें समझने तथा उनकी बातों का मूल्यांकन करने की शक्ति का नाम है।
विज्ञान के अनुसार चेतना वह अनुभूति है जो मस्तिष्क में पहुँचनेवाले अभिगामी आवेगों से उत्पन्न होती है। इन आवेगों का अर्थ तुरंत अथवा बाद में लगाया जाता है। चेतना मनुष्य की वह विशेषता है जो उसे जीवित रखती है और जो उसे व्यक्तिगत विषय में तथा अपने वातावरण के विषय में ज्ञान कराती है। इसी ज्ञान को विचारशक्ति (बुद्धि) कहा जाता है। यही विशेषता मनुष्य में ऐसे काम करती है जिसके कारण वह जीवित प्राणी समझा जाता है। मनुष्य अपनी कोई भी शारीरिक क्रिया तब तक नहीं कर सकता जब तक कि उसको यह ज्ञान पहले न हो कि वह उस क्रिया को कर सकेगा। कोई भी मनुष्य किसी विघातक पदार्थ अथवा घटना से बचने के लिए अपने किसी अंग को तब तक नहीं हिला सकता, जब तक कि उसको यह ज्ञान न हो कि कोई घातक पदार्थ उसके सामने है और उससे बचने के लिए वह अपने अंगों को काम में ला सकता है। उदाहरणार्थ, हम एक ऐसे मनुष्य के बारे में सोच सकते हैं जो नदी की ओर जा रहा है। यदि वह चलते-चलते नदी तक पहुँच जाता है और नदी में घुस जाता है तो वह डूबकर मर जाएगा। वह अपना चलना तब तक नहीं रोक सकता और नदी में घुसने से अपने को तब तक नहीं बचा सकता जब तक कि उसकी चेतना में यह ज्ञान उत्पन्न नहीं होता कि उसके समने नदी है और वह जमीन पर तो चल सकता है, परंतु पानी पर नहीं चल सकता। मनुष्य की सभी क्रियाओं पर उपर्युक्त नियम लागू होता है चाहे, ये क्रियाएँ पहले कभी हुई हों अथवा भविष्य में कभी हों। मनुष्य केवल चेतना से उत्पन्न प्रेरणा के कारण कोई काम कर सकता है।

Saturday, October 26, 2013

आज का प्रश्न-481 question no-481

आज का प्रश्न-481 question no-481

प्रश्न-481: सिलिका क्या है ? रेत , बालू , कांच , पत्थर , मेँ भी कोई अंतर होता है क्या?

उत्तर : उत्तर: सिलिका, यह सिलिकान और आक्सीजन का यौगिक है, इसका रासायनिक नाम SiO2(सिलिकान डाय आक्साईड) है। रेत, बालू, कांच और पत्थर, इन सभी मे सिलिका मौजूद होता है, अंतर इनके क्रिस्टल संरचना मे होता है। इसके क्रिस्टल संरचना की जानकारी आप इस लिंक से प्राप्त कर सकते है 

आज का प्रश्न-480 question no-480

आज का प्रश्न-480 question no-480

 
प्रश्न-479: क्या पृथ्वी को श्याम विवर (Black Hole)से भविष्य मे कोई परेशानी/संकट हो सकता है?

उत्तर :  पृथ्वी से हजारो प्रकाशवर्ष की दूरी पर कोई भी श्याम विवर नही है। हमारा सूर्य सारे सौर मंडल के साथ आकाशगंगा ’मंदाकिनी’ की परिक्रमा कर रहा है, संभव है कि भविष्य मे वह किसी श्याम विवर के समीप पहुंचे लेकिन ऐसा लांखो करोडो वर्ष के बाद ही होगा। इसकी संभावना भी करोड़ो मे से एक है?