शनिवार, 3 मार्च 2012

आज का प्रश्न-223question no-223

आज का प्रश्न-223question no-223

प्रश्न-223 : निम्न उपनिषद-वाक्य की गणितीय व्याख्या (संख्याओं के संदर्भ में)  क्या होगी ?  
पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते। 
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्य्ते। 
उत्तर : इस उपनिषद-वाक्य की गणितीय व्याख्या संख्याओं के संदर्भ में इस प्रकार है कि जैसे अनंत संख्याएँ हैं उस में से कितनी भी संख्याएँ निकाल लो अनंत ही बचेगा और जिसे यानी संख्याओं को निकाला है वो भी अनंत ही है। 
अर्थात वह भी पूर्ण है और यह भी पूर्ण है पूर्ण में से पूर्ण निकल जाने पर भी पूर्ण ही बचता है। 
(That is complete, This is complete From complete, The complete has emerged Giving completeness of complete The complete remains.)
फेसबुक मित्रों बहुत बहुत धन्यवाद 
सभी टिप्पणी कर्ताओं का जी धन्यवाद
प्रस्तुति: सी.वी.रमण विज्ञान क्लब यमुनानगर हरियाणा     


1 टिप्पणी:

Ashish Shrivastava ने कहा…

दर्शन जी, इस श्लोक मे पूर्ण का अर्थ शून्य भी हो सकता है। तब भी श्लोक अर्थपूर्ण रहेगा।

प्राचिन भारतीय गणितज्ञो ने अनंत के लिये असंखेय शब्द का प्रयोग भी किया है।